विविध

            इस प्रष्ठ पर एसे कई उत्तर मिलेंगे जो अक्सर हमारे मन में आते रहते हें। यदि आप के मन में भी कोई प्रश्न या कोई नया एवं प्रामाणिक उत्तर हो तो टिप्पणी में दर्ज करें। विस्तारित जानकारी audichyamp@gmail.com  द्वारा प्रेषित करें।  उन प्रश्नो का उत्तर या आपकी उत्तर युक्त जानकारी आपके नाम सहित इसमें शामिल कर सकेंगे। इसी संक्षिप्त उत्तर को क्लिक कर विस्तारित जानकारी (लिंक क्लिक करें) भी सम्मलित की जा सकेगी।  
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सभी को चयन का मोका तो मिलता हे,
पर अक्सर उसे पहचान नहीं पाते,
इससे तलाश कभी खत्म नहीं होती। 
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  • जन्म कुंडली मिलाये बनाइये नवभारत टाइम्स की इस पत्रिका मिलान और जन्मकुंडली बनाने की सुविधा अपनी व अपने भावी जीवन साथी की कुंडली का मिलान कर सकते हैं और साथ ही बना सकते हैं। 

निम्न सूची के अतिरिक्त भी जानकारी इस प्रष्ट हें ओर भी जानकारियों बढ़ती रहेंगी। आप भी इसमें शामिल हो सकते हें॥ 
  •  क्या सभी ब्राह्मण ऋषियों की संतान हें?
  • औदीच्य ब्राह्मण किन्हे कहते हें? 
  • गोत्र ,प्रवर, कुलदेवी आदि क्या हें। 
  • अवटंक या सर नेम क्या होता है?
  • सहस्र औदीच्य ब्राह्मण केसे हुए ओर कोन हें? 
  •  अखिल भारतीय औदीच्य महासभा की स्थापना कब ओर कहाँ हुई?
  •  गोविंद माधव कोन हें?
  • सहस्र औदीच्य ब्राह्मणो की पत्र पत्रिकायें कितनी हें,ओर कब से प्रकाशित हो रही हें? 
  • आदि आदि 
ओर भी -- देखें
  • शक्ति पीठ कितने हें? 
  • हम आरती क्यों करते है ?
  • हम नमस्कार या प्रणाम क्यों करते है ?
  • हम बडो के पैर क्यों छूते है ?
  • आदर कितने प्रकार से देते हें?
  • ॐ का उच्चारण क्यों करते है ?
  •  प्रकाश तो बिजली से भी हो सकता है, फिर दीपक की क्या आवश्यकता ? 
  • श्राद्ध, तर्पण, पिंड दान, क्या होते हें?
  • क्यों नहीं रखते पूर्व और दक्षिण दिशा में पैर? 
  • आदि आदि --
  • भवन बनाने के समय नीव के मूहूर्त में सर्प व कलश जमीन में क्‍यों डालते हैं?
  • हिन्‍दू पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार शेषनाग के मस्तिष्‍क (फण) पर यह सारी प्रथ्‍वी टिकी हुई है। इसलिए ऐक चांदी का सर्प बना कर उसमें शेषनाग की प्रतिष्‍ठा की जाती है और उसे नींव में डाला जाता है। इसके पीछे यह भावना रहती है कि जिस प्रकार से शेष नाग प्रथ्‍वी के अक्षुण्‍ण्‍ा रूप को धारण किए हुए है, उसी प्रकार से मेरे इस भवन की नींव भी सर्प के मस्तिष्‍क पर स्थिर रूप से स्‍थापित रहे। भूमि के नीचे पाताल लोक है। पाताल लोक का स्‍वामी नाग है। अत अशुभ के निवारण के हेतु भी नाग का पूजन किया जाता है। चुंकि शेष नाग क्षरसागर में रहता है अत कलश में दूध, दही, घी डालकर क्षीरसागर की कल्‍पना कर उसे मन्‍त्रों व्‍दारा आवाहित किया जाता है। इस कारण इस विष्‍णु कलश में लक्ष्‍मी के रूप में एक सिक्‍का भी डाला जाता है। जिसे भी कलश के साथ जमीन में डालते हैं। नींव पूजन का सारा कर्मकाण्‍ड इन्‍हीं मनोवैज्ञानिक तथ्‍यों पर आधारित है।
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इस प्रष्ट पर जानकारियों बढ़ती रहेंगी। आप भी इसमें शामिल हो सकते हें। 

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