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भर्त्रहरी वैराग्य शतक का काव्य एवं भावानुवाद पर लोक सुधारें हम कैंसे ? डॉ ओ .पी . व्यास


प्राचीन उज्जयनी के राजा भ्रत्हरी  (भरथरी) जिन्होंने वैराग्य के बाद नीति शतक  एवं कई ग्रंथो की रचना की उनके वैराग्य शतक के भाव का सक्षिप्त रूप इस रचना में देखने मिलता हे।यह सामान्य जन को आसानी से  समझ आ जाता हे। 


पर लोक सुधारें हम कैंसे?