रविवार, 28 सितंबर 2014

Rf140905 युवती दृष्टि त्रिवेदी ,बी ई (ई सी) टी सी एस मुंबई, 27 वर्षीय

Rf140905 युवती 
नाम-                                        दृष्टि त्रिवेदी 
पिता का नाम-                            देवदत्त त्रिवेदी (शर्मा), 

नवरात्रि व्रत का महत्व और वास्तविकता।




यदि आप हमारे इस भाव से सहमत है, तो अन्य को भी प्रेरणा के लिए पड़ने हेतु प्रचारित करें । 

समाज हित में प्रकाशित।आपको कोई जानकारी पसंद आती है, ऑर आप उसे अपने मित्रो को शेयर करना/ बताना चाहते है, तो आप फेस-बुक/ ट्विटर/ई मेल आदि, जिनके आइकान नीचे बने हें को क्लिक कर शेयर कर दें।

शनिवार, 27 सितंबर 2014

स्वगत-

स्वगत      
स्वगत
डॉ.मधु सूदन व्यास
<http://audichyabandhu.blogspot.com>

हम कोन हें - देव या दानव 
सुर (देवता) और असुर दोनों ही प्रत्येक व्यक्ति में होते हें। इसे ही सात्विक या तामस प्रकृति भी कहा जा सकता है।
आदि काल से अब तक भी सुर और असुरों का संग्राम चल रहा है।

जब कभी भी पूरे समाज में जब अराजकता और अवांछनीय गतिविधियों का प्रभुत्व स्थापित कर लेतीं है तो असुर विजयी होते हें।
प्रत्येक मनुष्य स्वयं यदि चाहे तो अपनी आसुरी प्रव्रत्तियों से स्वार्थ छोड़ कर छुटकारा पा सकता है।

जब तक हम केवल स्वयं हित के लिए प्रव्रत्त रहेंगे या चिंतन करते रहेंगे तब तक असुर साम्राज्य  समाप्त नहीं हो सकता।

जो अपने साथ अन्य के लाभ की भी सोचे वह इंसान मनुष्य कहला सकता है और जो अन्य  के लिए ही सोचे और करें वह सुर या देवता बन जाता है। केवल स्वयं की ही सोचने वाला राक्षस या असुर ही होगा।

हम क्या बनाना चाहते हें इसका निर्णय स्वयं ही करना होगा। 27/9/14
--------------------------------------------------------------------------
मंत्र सिद्धि 
मन्त्रों की सिद्धि के लिए नव रात्रि में साधना की जाती है, पर मन्त्र क्या हें, कितने जानते हें?
संस्कृत या किसी भाषा में समझ न आने वाला कोई शब्द के जाप अदि से सिद्धि नहीं मिल सकती। 
हर छोटी से छोटी बात या शब्द मन्त्र हो सकता हे, केवल उसके अर्थ को समझना और मन और आत्मा में स्थापित करना और अमल में लाने से सिद्धि प्राप्त की जा सकती है।
---------------------------------------------------------------------
 दैवी की सिद्धि 

नवरात्रि का आरंभ हो गया है। कुछ ने दैवी को प्रसन्न करने हेतु व्रत/ उपवास और साधना का भी प्रारम्भ कर दिया है। 

यदि आप वास्तव में पाखंडी नहीं है, और वास्तव में दैवी को सिद्ध करना (प्रसन्न करना) तो यदि केवल एक संकल्प लें, की आज से दैवी स्वरूप स्त्रियॉं को प्रताड़ित करना, उन्हे बुराभला कहना, मार पीट करना, बात बे बात पर अपमानित करना) की आदत, कुत्सित और गंदी भावना से देखना, छोड़ते नहीं हें, तो आपसे दैवी प्रसन्न कदापि नहीं हो सकतीं, चाहे आप व्रत उपवास कुछ भी न करें। 
याद रखें की हर अपराध की एक सीमा होती है, फिर महिषासुर आदि की तरह वह नष्ट हो जाता है। 
25/09/14
------------------------------------------------------------

सच्चा मंत्र 
सकल पदारथ हें जग माहीं, कर्म हीन नर पावत नाहीं।

यह एक एसा मन्त्र हे जिसे सभी को हमेशा याद रखना ऒर अमल में लाना चाहिए।
भाग्य के भरोसे कुछ भी प्राप्ती की आशा व्यर्थ है।
--------------------------------------------------------------------------------------
हिन्दू (सनातन ) धर्म की विशेषता। 
सनातन हिन्दू धर्म को छोड़कर लगभग हर धर्म में उसके अनुयाई प्रतिदिन, प्रति सप्ताह, या उस धर्म के नियमानुसार, उनके धर्म स्थल पर नहीं जाते, या निर्देशानुसार पुजा अर्चना, ईबादत आदि नहीं करते तो उन्हे उस धर्म का अनुयाई नहीं माना जाता। उन्हे दंडित किया जाता है। 
पर कोई हिन्दू कभी भी मंदिर न जाए तब भी वह हिन्दू ही कहलाता है। 
एसा इसलिए है की हिन्दू धर्म प्रत्येक को अपनी आत्मा की आवाज पर स्वतंत्रता से निर्णय करने की छूट देता है।
-------------------------------------------------------------------
आस्तिकता 
हम भोतिक वादी हें,और ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करते।
पूर्व में जो घट चुका उसे बदल नहीं सकते और भविष्य में क्या होने वाला हे इस पर हमारा अधिकार नहीं, तो फिर क्यों न परिस्थिति पर छोड़ दिया जाये और सोचा जाये की सब अच्छा होगा, तो फिर यह क्यों न माना जाये की सब अच्छा ही होगा तो क्या इसे किसी शक्ति की मर्जी माना नहीं जा सकता? 
क्या?यहीं ईश्वर का होना सिद्ध हो जाता है।
------------------------------------------------------------
मन की आवाज 
अकसर हम मन की आवाज को अनसुना कर देते हैं। हमारी कथित तर्कबुद्धि दिल की हल्‍की सी आवाज को कहीं दबा देती है। हम देख और सुन ही नहीं पाते उस इशारे को, हमें वह आवाज जरूर सुननी चाहिये। इस आवाज को अनसुना करना हमें मुश्किल में फंसा देता है। बेशक भौतिक सुविधायें हमारे लिए जरूरी हैं, लेकिन इससे सच्‍चा सुख नहीं मिलता। अपने दिल की सुनिये, भोतिक सुविधाओं से हटकर विश्वास/ समर्पण/प्रेम ही सच्‍चा सुख दिला सकता है।
-----------------------------------------------------------------------------------------
बड़ा शत्रु 
हमारे अपने ही हमारे सबसे बड़े शत्रु होते हें, क्योंकि ज्ञात शत्रु यदि कष्ट पहूंचाते हें तो हम इसके लिए तैयार रहते हें और सामना कर पाते हें, अपने का आक्रमण सब कुछ समाप्त कर देता है और निराशा को जन्म देता है। अपनों को जानना चाहिए कि वह केवल स्वयं कि खुशी के लिए जीवित नहीं कोई अन्य भी हें जो उससे अपेक्षा रखते हें। 
जीवन कि इस सच्चाई को जीवन में उतारने वाला ही अंत में सब सुख पाता है।
----------------------------------------------------------
मित्रता और विश्वास
मित्रता और विश्वास स्थापित करने के लिए शीघ्रता अच्छी नहीं होती। जिस तरह परिपक्व व्रक्ष और पोधे पर ही फूल और फल लगता है, उसी प्रकार मित्रता और विश्वास का फल, सम्बन्धों की परिपक्वता पर ही फूलता है। 
पहिले समय के साथ इन्हे बढ्ने दिया जाए, स्नेह और मधुरता से सींचा जाएँ, सहयोग की खाद से फलित किया जाए, समर्पण से स्थिर और द्रड किया जाए, मित्रता और विश्वास स्वयं ही उत्पन्न जाएगा, किसी को इस बात को कहने की जरूरत भी नहीं होगी, जब यह मित्रता, विश्वास फूलेगा फलेगा तो सारा संसार स्वत: जान जाएगा।
क्षमा 
क्षमा मांगने का यह अर्थ कदापि नहीं होता की क्षमायाचना करने वाले ने कोई अपराध किया ही हो! यह विनम्रता का प्रतीक है। जो जितना अधिक विनम्र होगा उतना ही अधिक झुकता रहेगा। हरे भरे फलों से लदे ब्रक्ष ही झुकते हें। जो घमंड में चूर होते हें वे शीघ्र ही सूखे पेड़ की तरह गिर कर नष्ट हो जाया करते हें। 

सभी हरे भरे पेड़ों को चाहते हें, वहीं सूखे पेड़ों को शीघ्र हटा देना आवश्यक समझते हें।  
मधु सूदन 
******
क्षणिक जोश,अधेर्य,निराशा,और आत्म विश्वास की कमी -ये "नास्तिकता" के चिन्ह हें।
****
अपने को बड़ा मान लेने से केवल अपनी ही हानी नहीं होती, उन्नति भी रूक जाती हे क्योंकि ओरों को तुच्छ समझ उनसे कुछ सीख नहीं पाते। 
***

बुधवार, 17 सितंबर 2014

RM140903 युवक डॉ. सुमित रावल ,31 वर्षीय एम बी बी एस हार्ट सर्जरी पीजी प्रशिक्षण हेतु ,

RM140903 युवक 
नाम –                    डॉ. सुमित रावल
पिता -                   कमल किशोर रावल, 

Rm140901 युवक योगेश वशिष्ठ,एम टेक (आई टी) ,व्याख्याता एम आई टी उज्जैन

Rm140901 युवक    
नाम –                  योगेश वशिष्ठ 
पिता का नाम –           बालमुकुंद वशिष्ठ   

Rf-140903 युवती श्वेता पाण्डे एम एस सी स्टेटिक्स (स्टडी) 21 वर्षीय

Rf-140903 युवती 
नाम-                                     श्वेता पाण्डे , 
पिता का नाम-                      महेश पाण्डे, 

मंगलवार, 16 सितंबर 2014

Rm140902 युवक महेंद्र कुमार ठाकुर, बी कॉम एम ए PGDCA

Rm140902 युवक 
नाम-                                              महेंद्र कुमार ठाकुर 
पिता का नाम-                               ईश्वर लाल ठाकुर,  

Rf 140902 युवती-सृष्टि व्यास B.E. (EC) M.E. (EC), Assistant Professor (ECE Dept.

Rf 140902 युवती 
नाम     -                                                       सृष्टि व्यास 
पिता का नाम-                                               पं॰ श्यामनारायण व्यास