आज जैन समाज का "क्षमापना महोत्सव"मनाया जा रहा हे| 
पूरे वर्ष भर हम सभी के द्वारा
जाने अनजाने बहुत सारे अच्छे या किसी का दिल दुखाने जेसे काम भी हो जाते हें और उनका हमको पता भी नहीं चलता| यदि एक दिन हम सार्वजानिक रूप से एवं प्रत्येक सम्पर्क वाले व्यक्ति से "क्षमा याचना " कर लें तो इसमें न तो कोई धर्म या सम्प्रदाय अस्वीकार करेगा और न ही किसी को बुरा लगेगा| तो फिर हम सब ही इस दिन को क्षमा पर्व के रूप में क्यों न मनाये? जब हम अन्यधर्मो/सम्प्रदायों के द्वारा अपनाये जा रहे वेलेंटाइन दिवस आदि जेसे कई दिन बड़े उत्साह से मानते हें तो यह दिन क्षमा दिन के रूप में स्वीकार कर लिए जाने में किसी को क्या आप्पत्ति हो सकती हे| आइये आज हम सब एक दुसरे से और सभी संपर्को से क्षमा की याचना करें|
डॉ मधुसुदन व्यास
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