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उपनिषद-हिन्दू सभ्यता की धरोहर|


उपनिषद 
हिन्दू सभ्यता की धरोहर 

संकलित एवं सम्पादित 

डॉ.मधुसूदन व्यास एवं डॉ.कल्पना व्यास  

उपनिषद वेद का वह भाग हे जिसमें विशुद्द रीत से अद्यात्मिक चिंतन को प्राथमिकता दी गई हे, और फल सम्बन्धी कर्मो के दृढानुराग को शिथिल करना सुझाया गया हे |
'उपनिषद' कहलाता है।

 वेदों के लिए चार विभाग उनके विवरण अनुसार,

भर्त्रहरी वैराग्य शतक का काव्य एवं भावानुवाद पर लोक सुधारें हम कैंसे ? डॉ ओ .पी . व्यास


प्राचीन उज्जयनी के राजा भ्रत्हरी  (भरथरी) जिन्होंने वैराग्य के बाद नीति शतक  एवं कई ग्रंथो की रचना की उनके वैराग्य शतक के भाव का सक्षिप्त रूप इस रचना में देखने मिलता हे।यह सामान्य जन को आसानी से  समझ आ जाता हे। 


पर लोक सुधारें हम कैंसे?

वेदों में स्त्री

       वेद नारी को अत्यंत महत्वपूर्ण, गरिमामय, उच्च स्थान प्रदान करते हैं| वेदों में स्त्रियों की शिक्षा- दीक्षा, शील, गुण, कर्तव्य, अधिकार और सामाजिक भूमिका का जो सुन्दर वर्णन पाया जाता है, वैसा संसार के अन्य किसी धर्मग्रंथ में नहीं है| वेद उन्हें घर की सम्राज्ञी कहते हैं
और देश की शासक, पृथ्वी की सम्राज्ञी तक बनने का अधिकार देते हैं|
वेदों में स्त्री यज्ञीय है अर्थात् यज्ञ समान पूजनीय| वेदों में नारी को ज्ञान देने वाली, सुख – समृद्धि लाने वाली, विशेष तेज वाली, देवी, विदुषी, सरस्वती, इन्द्राणी, उषा- जो सबको जगाती है इत्यादि अनेक आदर सूचक नाम दिए गए हैं|.
वेदों में स्त्रियों पर किसी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं है – उसे सदा विजयिनी कहा गया है और उन के हर काम में सहयोग और प्रोत्साहन की बात कही गई है|