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महासभा मप्र इकाई के वर्तमान जिलाध्‍यक्षों की बैठक 9 नवंबर 14 को आयोजित।

महासभा मप्र इकाई के वर्तमान जिलाध्‍यक्षों की  बैठक 9 नवंबर 14 को आयोजित

उज्‍जैन

अ;भा;औदीच्‍य महासभा की मध्‍यप्रद्रेश इकाई के वर्तमान जिलाध्यक्षों की अन्तिम बैठक दिनांक 9 नवम्‍बर 2014 प्रात 11 बजे,महामालव औदीच्‍य धर्मशाला,क्षीरसागर उज्‍जैन में आयोजित की गई है । सभी जिलाध्‍यक्षों से निवेदन है कि वे बैठक के लिए महासभा के सदस्‍यों की सूचि,रसीद कटटो की जानकारी ,अभी तक प्राप्‍त राशि का पूर्ण विवरण ,बैंक खाता क्र्मांक आदि जानकारी अवश्‍य लेकर आवें । बैठक में निर्धारित समय से पूर्व पधारने का कष्‍ट करें ।

रवि ठक्‍कर                                                                                                                     प्रकाश दुबे
महामंत्री                                                                                                                            अध्‍यक्ष
अ;भा; औदीच्‍य महासभा मप्र इकाई
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॥श्रीस्थल प्रकाश को घर-घर का प्रकाश बनाएँ॥

श्रीस्थल प्रकाश को समाज के घर-घर का प्रकाश बनाएँ। 
सहस्रौदीच्यों के गौरव की गाथा अगली पीढ़ी भी गायें ॥
उज्जैन से बाहर श्रीस्थल प्रकाश प्राप्त करने हेतु  श्रीस्थल प्रकाश ग्रन्थ  हेतु-
एक पुस्तक = रु- 150+25 रजि पोस्ट खर्च) कुल रु- 175/
10+2  = 1500+ पोस्टेज अतिरिक्त लगभग 100/- कुल रु=1600/- 
50+10 =  रु 7500+ अतिरिक्त पोस्टेज  व्यय लगभग 300/- रु कुल रु=7800/-
  राशि बेंक ड्राफ्ट/ मनीआर्डर अथवा सीधे अखिल भारतीय औदीच्य महासभा मध्यप्रदेश शाखा 
 पंजाब नेशनल बेंक उज्जैन, अकाउंट नंबर Punb 2963000103121857 / में जमा करें
 ई-मेल- audichyamp@gmail।com/
 अपना पिन कोड सहित पता एवं राशि जमा कर सूचना देवें। 
संपर्क - फोन नं-0734-2514343/ 0734-2515677 पर सूचित अवश्य करें।
 प्रकाश दुबे- 41 विध्या नगर उज्जैन मप्र 
श्रीस्थल अर्थात सिद्धपुर नाम है, उस स्थान का जहाँ से सहस्त्रोदीच्य ब्राह्मणो को पहचाना गया था, विश्व में उनकी विद्वता और ज्ञान का सम्मान किया गया था। आज एक सहस्र वर्ष में हम एक करोड़ से अधिक होकर विश्व के प्रत्येक भाग में स्थापित होकर अपने ज्ञान से उस देश को सम्पन्न बनाने में सतत अपना योगदान कर रहे हें। नई जगह नया समाज नये संघर्ष के साथ पीढ़ी-दर पीढ़ी हम खो भी देते हें,"कुछ गौरव के पल" जो हमारे अतीत गौरव के इतिहास को स्मरण रखकर इस माध्यम से ही चिरजीवी रखा जा सकता है।

जीवन संघर्ष रत वे जाति जो अपना इतिहास सुरक्षित रखती हें वे ही ठहर पातीं हें। एक नेत्रहीन व्यक्ति की तरह अल्पसंख्यक और शांति प्रिय जातियाँ इतिहास के माध्यम से ही अपनी उन्नति का मार्ग टटोल सकतीं हें। वर्तमान दादागीरी, दवंगता, और विद्वत जन के प्रति नित नए हो रहे षडयंत्रों के विरुद्ध शुद्ध, सात्विक और प्रताड़ित जातियों को उनके जींस से प्राप्त ज्ञान, बल, को स्मरण कराने के लिए इतिहास से बढ़कर कोई साधन नहीं है।
अखिल भारतीय औदीच्य महासभा  [http://abaudichyasmahasabharg.blogspot.in/]की समस्त गतिविधियों के बारे में जानने के लिए यह नई साइट बनाई गई है।  देखें




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