उदीच्य या औदीच्य का अर्थ है, उदीची या सूर्य के उदित होने की दिशा, भारत का उत्तर पूर्व भू भाग, जहाँ प्रमुख रूप से हिंदी भाषियों का निवास है|
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घनी याद आवे बचपन ने बचपन को जमानो।
Rajesh Bhandari
घनी याद आवे बचपन ने बचपन को जमानो
घनी याद आवे बचपन की ,ने बचपन को जमानो,
वी तेवार मनानो ने खुसी को गीत गानों।
उ हिड तो बनानो ने तलाव पे घुमानो,
वी गारा का कोटडा ने भितडा लिपवनो।
वा गोरधन की पूजा ने मांडना बनानो,
गोरधन में गाड़ी के बम को छुडानो।
ढोर होण का सिंग रंगनो ने छापा लगानो,
बेल होण रंग बिरंगा फुनदा ने सेला पेरानो।
सबेरे सबेरे ढोर का पाव में लड़ को छुडानो,
खोटा फटाका की बारूद से सुर्री छुडानो,
साळ की धानि ने रंगीन बर्फी को खानों।
खेत मॉल ने कोठा में दिवा को लगानो,
वा धोक पड़वा पे पग्गे लाग्नो ने लगानो।
घनी याद आवे बचपन की ,ने बचपन को जमानो॥
इस साईट पर उपलब्ध लेखों में विचार के लिए लेखक/प्रस्तुतकर्ता स्वयं जिम्मेदार हे| इसका कोई भी प्रकाशन समाज हित में किया जा रहा हे|सभी समाज जनों से सुझाव/सहायता की अपेक्षा हे|
समय कटता नहीं ?
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| समय को काटो मत, बाटो |
समय कटता नहीं ?
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शिकायत है सभी की,समय कटता नहीं ?
कोशिश तो करते है, समय बटता नहीं ।
आदमी दोहरी बातें, करने का आदि है,
दोस्तों से कहता है ,समय मिलता नहीं।।
दिया सबको समय 24 घन्टे का विधि ने,
सरिताओं को न बुलाया कभी जलनिधि ने।
सूरज,चाँद भी समय से शिकवा नहीं करते,
समय खर्च का ब्यौरा न माँगा परिधि ने।।
समय पर आलस्य हुआ हावी तो,बन्टाढार ,
समय अनमोल है, समय से हम करें प्यार।
समय किसी से दोस्ती,दुश्मनी करता नही
समय का सबको मानना चाहिये आभार।।
समय की मार, बिना आवाज के पडती है,
समय को सँवार ,प्रकृति मानव से कहती है।
संगीत से सरगम,मन से ममता निकल जाये,
समय नर्क बन जायेगा,दुनियादारी कहती है।।
समय को काटो मत, बाटो समय को हिस्से में,
समय से करो परिश्रम,बिताओ न समय किस्से में।
उद्धव जोशी , उज्जैन
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