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समय पे जो मिल जाये भय्या, वह ही भाग बनाय|

समय पे जो मिल जाये भय्या, वह ही भाग बनाय|

वर्तमान में विवाह योग्य कन्याओं की कमी ने युवको के लिए युवतियों के विकल्प कम किये हें, फिर भी युवक [या लड़के वाले?] भाव खाते हें| -
कुछ लिखने का प्रयास है क्षमा सहित- डॉ मधु सूदन व्यास







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समय कटता नहीं ?

समय को काटो मत, बाटो  
समय कटता नहीं ?
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शिकायत है सभी की,समय कटता नहीं ?
कोशिश तो करते है, समय बटता नहीं ।
आदमी दोहरी बातें, करने का आदि है,
दोस्तों से कहता है ,समय मिलता नहीं।।
 
दिया सबको समय 24 घन्टे का विधि ने,
सरिताओं को न बुलाया कभी जलनिधि ने। 
सूरज,चाँद भी समय से शिकवा नहीं करते,
समय खर्च का ब्यौरा न माँगा परिधि ने।।

समय पर आलस्य हुआ हावी तो,बन्टाढार , 
समय अनमोल है, समय से हम करें प्यार।
समय किसी से दोस्ती,दुश्मनी करता नही
समय का सबको मानना चाहिये आभार।।
 
समय की मार, बिना आवाज के पडती है,
समय को सँवार ,प्रकृति मानव से कहती है। 
संगीत से सरगम,मन से ममता निकल जाये,
समय नर्क बन जायेगा,दुनियादारी कहती है।। 
 
समय को काटो मत, बाटो समय को हिस्से में,
समय से करो परिश्रम,बिताओ न समय किस्से में।

उद्धव जोशी , उज्जैन
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कविता 


कविता क्‍यारी, बीज विचार,कविता को है भावों से प्‍यार ।

कविता में षठरस की छाया, कविता में शब्‍दों का आकार।। 

कविता है गागर में सागर,कविता में उतरा नट नागर । 

कविता रचती सो कहती,कवितामय होता कवि गा कर।।

कविता में अपनेपन का साया,कविता ने सदा हंसाया रूलाया।

कविता का इतिहास पुराना,कविता का रस सबके मन भाया।। 

कविता ने कवियों को बनाया,कविता ने कवियों को सजाया । 

कविता जब सुनों लगती ताजी,कविता ने मनुज का अहं गलाया। ।

कविता मानों तुलसीक़त रामायण,कविता सदाबहार करो पारायण।

कविता बुनो,चुनो और सुनो,कविता से मिल जाते नारायण ।।
                                                                                            उघ्‍दव जोशी उज्‍जैन
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आओ बेन आपण राखी मनावा-राजेश भंडारी

रक्षा बंधन 
आओ बेन आपण राखी  मनावा
आओ बेन आपण राखी  मनावा
नाना के देवा ने मोटा से आशीष पावा
दुःख सुख में आड़े आने को वचन निभावा
दो दन की जिन्दगी दो पल साथ बीतावा
आओ बेन आपण  राखी  मनावा

भावज सारू चुडिलो ने लुगड़ो मगावा
नाना भतीजा सारू झागल्यो झूल सिवावा
भाई होण सारू चम् चमाता जाकेट मंगावा
आओ बेन आपण  राखी  मनावा

बणावा दाल बाटी ने , लड्डू बाजार से मंगावा
चटनी धणा मिर्ची की ने खातो कचूमर बणावा
रांदा सब्जी आलू की ने चरखी दाल बणावा
आओ बेन आपण  राखी  मनावा

राजेश भंडारी बाबु,१०४ महावीर नगर इंदौर 
टिक्को काड़ा भाई के  ने उनसे आशीष पावा
लम्बी ऊमर सारू देवी देवता के मनावा
भाई होण की आरती करी के मिठाई खिलवा
आओ बेन आपण  राखी  मनावा
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आओ होली मनाये-नारायणी माया


आओ होली मनाये

आई है होली रंग भरी, इस पर्व को मनाये,

नाता है एक दूजे से, इसे न भूल जाये|

बहुत बड़ी हे दुनिया, इसमे न खो जाये,

रंग और उमंग में बसी, प्रीत को जान जाये|


कितने भी दूर हो, लेकिन मेरी ऊँची हे सदाए,

होली के रंग खेले संग, कभी न भूल पाए|

प्रीत के इस पर्व पर, तुम हमे और हम तुम्हे बुलाये,

माना दुनिया का सफर कठिन हे, आती आंधी और हवाए|

पर जरुरी नही की हम, दुनिया में इसी रूप में दोबारा आये,


प्रेम का  लेन देन न कर सके, जीवन में यह सोच कर न पछताए|

सुनहरी किरणे आतुर खड़ी स्वागत में, दूर कर दे काली घटाए,

हम तो है उन्ही के वो भी है हमारे, सोच कर मुस्कुराये|

छोटी सी है यह जिन्दगी, यु ही न चली जाये,


आज मिलकर करे एक वादा, दे सभी को दुआए|

पगडंडी लम्बी है पर इतनी संकरी नही की, उसमे दो नही समाये,

प्रेम स्नेह की बरसात हो, सभी के जीवन में खुशिया छाए|

आओ होली मनाये ,आओ होली मनाये||
नारायणी माया 
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Audichya Bandhu औदीच्य बंधु: "कनाडा यात्रा "A travel to CANADA Dr O P Vyas

Audichya Bandhu औदीच्य बंधु: "कनाडा यात्रा "A travel to CANADA Dr O P Vyas: श्रीमति कृष्ण व्यास एवं डॉ . ओ .पी .व्यास गुना म .प्र. मेरी "कनाडा यात्रा " A travel to CANADA 10 दिसम्बर 2010 आय...

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भर्त्रहरी वैराग्य शतक का काव्य एवं भावानुवाद पर लोक सुधारें हम कैंसे ? डॉ ओ .पी . व्यास


प्राचीन उज्जयनी के राजा भ्रत्हरी  (भरथरी) जिन्होंने वैराग्य के बाद नीति शतक  एवं कई ग्रंथो की रचना की उनके वैराग्य शतक के भाव का सक्षिप्त रूप इस रचना में देखने मिलता हे।यह सामान्य जन को आसानी से  समझ आ जाता हे। 


पर लोक सुधारें हम कैंसे?