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औदीच्य रत्न ऋषि दयानन्द का स्वलिखित जीवनवृत


औदीच्य रत्न ऋषि दयानन्द का स्वलिखित जीवनवृत  देखे लिंक  ⇓




          Audichya Bandhu.Org औदिच्य बंधू .ओआरजी 

             http://audichyabandhu.org/pride/

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सुख और शान्ति के 7 मूल मंत्र

  1. सफलता का सूत्र ; आस्‍था और अनुशासन ।
  2.  सामाजिक जीवन याने संबंधों का जीवन ।
  3. चार बातों का विकास करिए  शरीर बल, चरित्र बल,मनोबल और बुध्दि बल ।
  4. चेतना के सूत्र   प्रामाणिक व्‍यवहार, म्रदु व्‍यवहार,निश्‍चल व्‍यवहार,निष्‍पक्ष व्‍यवहार,विनम्र व्‍यवहार। 
  5. धर्म का अर्थ  राग व्‍देष मुक्‍त जीवन जीना।
  6. स्‍थान परिवर्तन से कुछ नहीं होता। स्‍वभाव और वाणी को बदलने से ही सम्‍मान मिल सकता है।
  7. विधायक भावों का जितना अधिक विकास होगा,उतना ही संवेदनशीलता का सूत्र आगे बढेगा।
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विचार शक्ति

            मुख मन का दर्पण है, चेहरा मन का सांचा है, नेत्र आत्‍मा के वातायन माने जाते है।
विश्‍व का विधाता विचार है। चित्‍त को सदा तरूण बनाये रखना चाहिए। 
वि‍वेकी मनुष्‍य सदा सतर्क, सजग और सावधान रहता है।
भगवान बुध्‍द ने कहा है कि हम अपने विचारों से ही बने हैं, सुझाव में ही उपचार है।
भाग्‍य पर निर्भर रहने से अकर्मण्‍यता और आलस्‍य की वृध्दि होती है।
सभी क्षमतायें, सारी शक्तियां और सारे सामर्थ्‍य हमारे अन्‍दर ही हैं।
            मनुष्‍य विचार का बीज बोता है, और क्रति रूपी फल पाता है।
मनोबल प्राप्‍त करने का सर्वोत्‍क्रष्‍ट उपाय उन्‍नत, उदार और सद विचारों का चिन्‍तन है।

विचार चरित्र निर्माण की ईंटे है। 
पवित्र विचार एक वाणी है।
द्रढ निश्‍चय की शक्ति का विकास कीजिए।
सभी असत्‍य विचार  रोग के संदेश वाहक है, मृत्‍यु के अग्रदूत हैं।  
हमें सदा प्रसन्‍न और सन्‍तुष्‍ट रहना चाहिए।
    एक मनुष्‍य को आदर्श दूसरे के अनुरूप नहीं होता है।
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विभिन्न शक्तियां!-डॉ ओ.पी. व्यास नई सड़क गुना म. प्र.


विभिन्न शक्तियां !                                  नव रात्रि पर्व पर विशेष -{डॉ.ओ.पी व्यास कृत शब्दालोक(आकाशवाणी से प्रसारित हो चुका हे) से}
     परिचय                        डॉ.ओ.पी.व्यास नई सड़क गुना म.प्र. जन्म तिथि-२७-९-१९४२/जन्म स्थान-गुना म.प्र शिक्षा-बी.ए.एम.एस.जीवाजीवि.वि.ग्वालियर भूतपूर्व शासकीय आयुर्वेदिक चिकित्सक वर्तमान में चिकित्सक अनेक भाषाओं के ज्ञाता यथा-हिंदी,अंग्रेजीसंस्कृत ,उर्दू गुजरातीमराठीआदि|   रूद्र-महालय गुजराती फिल्म के परामर्श दाता/  पूर्व सम्पादकओदीच्य ब्राह्मण समाज समाचार पत्र|   वर्तमान अध्यक्ष-ओदीच्य ब्राह्मण समाज गुना|    प्रकाशित पुस्तक=जय रूद्र महालय --जिसमें काव्य मय ओदीच्य-ब्राह्मणों का इतिहास है|  अप्रकाशित ग्रन्थ-भर्त्रहरी शतकशिव-महिम्नकाव्यानुवाद,     अनेक संस्कृतउर्दू श्लोकों, शेरों का  हिंदी-काव्यानुवाद- गुरुदेव श्री रविन्द्र नाथ टेगोर  की गीतांजली के गीतों का हिंदी काव्यानुवाद|      विभिन्न काव्य  रचनाएँ विभिन्न रसों मेंविशेष रूप से हास्य कविताएँअनेक गीतफोटोग्राफीविडिओ शूटिंग में रूचि,     विशेष रुचि -कविता .साहित्य लेखन निरंतर आकाश वाणी,दूरदर्शन प्रसारणविभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन   पर्यटन में रुचि - भारत ,नेपाल ,कनाडा घूम चुके हैं तथा काव्य मय यात्रा व्रतांत लिख चुके हैं,जिनका प्रकाशन ,प्रसारण हो चुका है                             पता-डॉ. ओ.पी .व्यास नई सड़क गुना म.प्र.e mail  address --dropvyaspoet @gmail .com                                                      फेस बुक पर- omprkashvyas                          ब्लॉग dropvyaspoet.blogspot.com  मोबाइल नम्बर -४ २५७६६९१३

प्रत्येक व्यक्ति शक्ति की कामना करता हे, जीवन को, शक्तिशाली  कौन नहीं बनाना चाहता
कहा गया हे- माईट इज राईट 'जिसकी लाठी उसकी भेंस'!                                            प्रसिद्ध चिन्तक"मीनू मसानी"कहते हें-"जो शक्तिशाली हे, केवल वही बचते हें। दार्शनिक प्लेटो के महावाक्य है -"सबसे बड़ी जीत विरोधी के ह्रदय को जीत लेना है"। इसीलिए हम सब "शक्ति चाहते हैं। शक्ति की उपासना करते हें। शक्ति को "देवी" मानते हैं। विभिन्न प्रकार से शक्तियों का आव्हान करते हैं।                    शक्तियां कई प्रकार की होती हैं, जेसें - वाहुबल की शक्ति, शस्त्र बल की शक्ति,वाक-शक्ति,संगठन-शक्तिलोक शक्ति,युक्ति-शक्ति,राजनीती की शक्तिविचार-शक्तिक्रांति शक्तिआध्यात्मिक-शक्ति, और आत्म-शक्ति या आत्मबल,आदि। 


कुछ शक्तियां परमात्मा ने सभी

मै और मेरे पिताजी

‎मै और मेरे पिताजी 

मै सोचता था 
जब

 5 साल का था तब
  मेरे पिता जी दुनिया के सबसे स्मार्ट और ताकतवर इंसान है|
10 साल की उम्र में
 मैंने महसूस किया की मेरे पिता जी हर चीज का ज्ञान रखनेवाले और बेहद समझदार भी है|
15 साल का हुवा
 तो महसूस करने लगा की मेरे दोस्तों के पापा तो मेरे पिताजी से जादा समझदार है
20 साल की उम्र में
 मेरी यह सोच बनी की मेरे पिता जी किसी और दुनिया के है और वह नए ज़माने के सांथ नहीं चल सकते
30 साल का हुवा तो
 महसूस किया की मुझे किसी भी काम के बारे में उनसे सलाह नहीं लेना चाहिए क्योकि उन्हें हर काम में नुख्स निकालने की आदत सी है
35 साल की उम्र मे
 मैंने महसूस किया की अब पिताजी को मेरे तरीके से चलने की समझ आ गई है ,इसलिए छोटी छोटी बातो पर सलाह ली जा सकती
 40 का हुवा
 तब  महसूस किया की कुछ जरुरी मामलो में पिताजी से सलाह लेना जरुरी है| 
50 साल की उम्र 
में मुझे लगा की पिताजी की सलाह के बिना कुछ नहीं करना चाहिए | 
और 
15 साल की उम्र के बाद की धारणाये गलत थी अब तक मेरे बच्चे बड़े हो चुके थे |
परन्तु अफ़सोस
 इससे पहले की मै अपने इस फैसले पर अमल कर पाता मेरे पिता  इसं दुनिया को अलविदा कह गए और मै उनकी हर सलाह व तजुर्बे से वंचित रह गया|

इन बातो को
बेटा समझता है बाप बनने के बाद 

बेटी समझती है माँ बनने

और 
बहु समझती है सास बनने के बाद

आप की क्या राय है

क्या कहती है मेरी सोच|