Audichya Bandhu 2017

Audichya Bandhu January  2017
औदीच्य बंधु  2017 पोष/माघ 2073, वर्ष 93 अंक- 

 Audichya Bandhu January  2017– 

Monthly Magazine in Hindi, 
औदीच्य बंधु सार्वजनिक न्यास द्वारा संचालित, सहस्र औदीच्य ब्राह्मण समाज का हिन्दी भाषा में इंदोर से प्रकाशित मासिक पत्र।
 जनवरी औदीच्य बंधू का डिजिटल एडिशन प्रस्तुत है विचारने योग्य इस लेख के साथ- देखें लिंक -  
डिजिटल प्रकाशन डॉ मधु सूदन व्यास एम आई जी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन। 

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Audichya Bandhu (औदीच्य बंधु पत्र)  वर्ष  2012/ 2014/ 2013/ 2015




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लेख आमंत्रित- विषय- हिन्दुओं में विवाह संस्कार दिन में क्यों न करें? वर्ष भर विवाह क्यों नहीं हो सकता?

हिन्दुओं में विवाह रात्रि में क्यों होने लगे हैं ?
        क्या कभी आपने सोंचा है कि हिन्दुओं में रात्रि को विवाह क्यों होने लगे हैं, जबकि हिन्दुओं में रात में शुभकार्य करना अच्छा नहीं माना जाता है? रात को देर तक जागना और सुबह को देर तक सोने को, राक्षसी प्रव्रत्ति बताया जाता है. रात में जागने वाले को निशाचर कहते हैं|  केवल तंत्र सिद्धि करने वालों को ही रात्री में हवन यज्ञ की अनुमति है|  वैसे भी प्राचीन समय से ही सनातन धर्मी हिन्दू दिन के प्रकाश में ही शुभ कार्य करने के समर्थक रहे है| तब हिन्दुओं में रात की विवाह की परम्परा कैसे पडी ?




   लेख आमंत्रित - लेख आमंत्रित- विषय- 
1- हिन्दुओं में विवाह संस्कार दिन में क्यों न करें
रात्रि कालीन विवाह विषयक निम्न (*हिन्दुओं में विवाह रात्रि में क्यों होने लगे हैं ?*) लेख नीचे देखें  (जानकारी) फेस बुक/मिडिया आदि पर देखी जा रही है|
यदि हिन्दू  समाज में यह परिवर्तन लाया जा सके तो अनावश्यक व्यय जो रात्रि विवाह में होता है बचा जा सकेगा| प्रदर्शन/ आडम्बर कम होंगे / आदि अनेक लाभ होंगे| आप  देश क्या कहते हें वे इस बारे में  मोलिक  लेख के रूप में भेजने का कष्ट करें,  लेख औदिच्य बंधू (वेव) में प्रकाशित होगा, पत्रिकाओं में भी प्रेषित किया जायेगा
2- वर्ष भर विवाह क्यों नहीं हो सकता? - 
देश में भोगोलिक परिस्थिति/ कृषि कार्य / आवागमन विकल्प /क्षेत्रीय समस्याएं आदि कई कारणों के चलते विवाह विशेष मुहूर्त में देव प्रबोधनी एकादशी से देव शयनी एकादशी के मध्य ही संपन्न होते रहे है
वर्तमान समय में अब एसी कोई समस्या नहीं है| चार माह तक विवाह करने के स्थान रिक्त रहते हें, विशेष मुहूर्त के चलते उन विशेष दिनों में धर्मशाला, होटल, और विवाह मंडप आदि का व्यय सबके सामर्थ्य से अधिक हो रहा है|   कई हिन्दू जातियों और पंजाब आदि प्रदशों वर्ष भर किये जाते हें और मुहूर्त न होने से भी कोई हानि नहीं होती| लाभ यह होता है की आर्थिक संसाधन और बेंड बाजा /घोड़ी / स्थान/  आदि आदि आसानी से कम व्यय पर जुटाए जा सकते हें|
·   तो फिर अब क्यों नहीं परिवर्तन किया जा सकता
·   किस काल से और क्यों यह परम्परा जारी है?
·   इस विषयक प्रमाण क्या है?  
·   आदि आदि अनेक बातों पर विचार कर लेख आमंत्रित है-
     e Mail <audichyamp@gmail.com> 
पता - मधु सूदन व्यास
एम् आई जी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन mp 
०७३४-२५१९७०७ 

*हिन्दुओं में विवाह रात्रि में क्यों होने लगे हैं ?* लेखक अज्ञात   कभी हम अपने पूर्वजों के सामने यह सवाल क्यों नहीं उठाते हैं या स्वयं इस प्रश्न का हल क्यों नहीं खोजते हैं?       दरअसल भारत में सभी उत्सव एवं संस्कार दिन में ही किये जाते थेमाँ सीता और द्रौपदी का स्वयंवर भी दिन में ही हुआ थाप्राचीन काल से लेकर मुगलों के आने तक भारत में विवाह दिन में ही हुआ करते थेमुस्लिम पिशाच* आक्रमणकारियों के भारत पर हमले करने के बाद ही, हिन्दुओं को अपनी कई प्राचीन परम्पराएं तोड़ने को विवश होना पडा थामुस्लिम पिशाच आक्रमणकारियों द्वारा भारत पर अतिक्रमण करने के बाद भारतीयों पर बहुत अत्याचार किये गयेयह आक्रमणकारी पिशाच हिन्दुओं के विवाह के समय वहां पहुच कर लूटपाट मचाते थे|  कामुक अकबर के शासन काल में, जब अत्याचार चरम सीमा पर थे,तो मुग़ल सैनिक हिन्दू लड़कियों को बलपूर्वक उठा लेते थे और उन्हें अपने आकाओं को सौंप देते थे.        भारतीय ज्ञात इतिहास में सबसे पहली बार रात्रि में विवाह सुन्दरी और मुंदरी नाम की दो ब्राह्मण बहनों का हुआ था,जिनका विवाह दुल्ला भट्टी ने अपने संरक्षण में ब्राह्मण युवकों से कराया था. उस समय दुल्ला भट्टी ने अत्याचार के खिलाफ हथियार उठाये थे.     दुल्ला भट्टी ने ऐसी अनेकों लड़कियों को मुगलों से छुडाकर, उनका हिन्दू लड़कों से विवाह कराया था |उसके बाद मुस्लिम आक्रमणकारियों के आतंक से बचने के लिए हिन्दू रात के अँधेरे में विवाह करने लगे.\ लेकिन रात्रि में विवाह करते समय भी यह ध्यान रखा जाता है कि नाच -गाना, दावत,जयमाल, आदि भले ही रात्रि में हो जाए लेकिन वैदिक मन्त्रों के साथ फेरे प्रातः पौ फटने के बाद ही हों.पंजाब से प्रारम्भ हुई परंपरा को पंजाब में ही समाप्त किया गया|

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औदीच्य बंधु 2016


अगहन/पोष 2073, वर्ष 92 अंक- 12, monthly Magazine in Hindi, 
औदीच्य बंधु नवम्बर 2016, अगहन/पोष 2073, वर्ष 92 अंक- 12, औदीच्य बंधु सार्वजनिक न्यास द्वारा संचालित, सहस्र औदीच्य ब्राह्मण समाज का हिन्दी भाषा में इंदोर से प्रकाशित मासिक पत्र।
सार्वजनिक न्यास द्वारा संचालित, , सहस्र औदीच्य ब्राह्मण समाज का हिन्दी भाषा में इंदोर से प्रकाशित मासिक पत्र। 

सहस्त्र औदिच्य ब्राम्हण समाज के हित में प्रसारित -

 “औदिच्य बंधू सितम्बर २०१६”   – एड्रोईड पर भी उपलब्ध  
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मेरी पूर्वांचल यात्रा - डायरी के पन्नो से -डॉ मधु सूदन व्यास

Madhusudan Vyas मेरी पूर्वांचल यात्रा 22/09/15 से 10/10/2015 तक
{https://picasaweb.google.com/104509035716669072709/YATRA229TO101015?authuser=0&feat=directlink}
गोरखपुर पहुँचने को हैं, 11 बजे काठमांडू के लिए प्रस्थान होगा।

Anil Madhav Dave Central Minister of India

Anil Madhav Dave Central Minister of India 
औदीच्यब्राह्मण समाज के यशस्वी जुझारू, व्यक्तित्व - श्री अनिल माधव दवे  
को  केन्द्रीय मंत्री पद हेतु शुभकामनाएं| - 

डॉ मधु सूदन व्यास उज्जैन मप्र

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HEALTH FOR ALL dr.vyas: Panchakarma – A miracle of Ayurvedic therapy for r...

Panchakarma – A miracle of Ayurvedic therapy for rejuvenation.
पंचकर्म – कायाकल्प की एक चमत्कारिक आयुर्वेद चिकित्सा पद्ध्ति .
{देनिक भास्कर (हेल्थ भास्कर) में दिनांक 08 मई 16 को प्रकाशित}--

परम्परागत चिकित्सा पद्धत्तियों में भारतीय चिकित्सा पद्ध्ति आयुर्वेद ने आज विश्व का ध्यान आकर्षित किया है| आयुर्वेद के बारे में लगभग हर भारतीय जानता है, पर अधिकतर लोग इतना ही जानते हें की जड़ी बूटी से आदि से किया जाने वाला इलाज आयुर्वेद हें| परन्तु यह जानकारी अति अल्प है| पिछले 1000 वर्षो से विदेशी शासको के साथ आई चिकित्सा पद्धतियों में यह पद्ध्ति कहीं खो गई थी, परन्तु अब पिछले 20 -30 वर्ष से पुन: अस्तित्व प्रदर्शित कर रही है| -----------
वास्तव में केवल जड़ी बूटी या आयुर्वेदिक औषधि को मुख से खिलाकर रोगी को लाभ देना मात्र आयुर्वेदिक चिकित्सा नहीं है, यह तो केवल चिकित्सा का अधिकतम 10 % ही है| शेष 90% चिकित्सा जो चरक, सुश्रुत आदि आचार्यों सेकड़ो वर्षो तक करते रहे हैं, वह शरीर का शोधन कर की जाने वाली चिकित्सा है, इसे वर्तमान में पंचकर्म चिकित्सा नाम से जाना जा रहा है----------------------
वर्तमान में पंचकर्म की इस पद्ध्ति के निष्णात चिकित्सक कुछ कम जरुर हैं, पर भविष्य में एसे चिकित्सको की संख्या बड़ने की उम्मीद नजर आ रही है| शासकीय स्तर के अतिरिक्त देश के कई भागो में एसे चिकित्सा केंद्र देखे जाने लगे हें जहाँ पंचकर्म अच्छे चिकित्सको द्वारा किया जा रहा है|

उज्जैन में प्रारम्भ हुआ आयुष पंचकर्म चिकित्सा एवं शोध केंद्र, 125 कंठाल चौराहा कोतवाली रोड उज्जैन
मप्र, एसा ही एक उदाहारण है| भारत और विदेश में वैज्ञानिकों और चिकित्सकों में -----

पूरा लेख पड़ें और पञ्च कर्म के बारे में सब कुछ जाने ---- क्लिक लिंक-
HEALTH FOR ALL dr.vyas: Panchakarma – A miracle of Ayurvedic therapy for r...: P anchakarma – A miracle of Ayurvedic therapy for rejuvenation. पंचकर्म – कायाकल्प की एक चमत्कारिक आयुर्वेद चिकित्सा पद्ध्ति . { देनि...


क्षमा याचना

क्षमा याचना 
 कतिपय निजी कारणों एवं  समयाभाव से यह साईट अपडेट नहीं  की जा  रही है, क्षमा|

समाज के अन्य निष्पक्ष महानुभाव जो अपना समय/ श्रम आदि देकर इस कार्य को करना और अपडेट करना चाहते हों, और इस कार्य में पशिक्षित हों वे सम्पर्क करें, उनका स्वागत रहेगा|
डॉ . मधु सुदन व्यास 
 [09425379102]

औदीच्य बंधु 2015

औदीच्य बंधु
औदीच्य बंधु सार्वजनिक न्यास द्वारा संचालित,
अखिल भारतीय औदीच्य महासभा का मुख पत्र,
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E Mail- audichyamp@gmail.com http://audichyabandhu.blogspot.in/   http://audichyabandhu.org/ 

















वर्ष २०१५ की अन्य समस्त पत्रिका देखें --

भगवान् गोविन्द माधव जयंती और चल समारोह संपन्न|

भगवान् गोविन्द माधव जयंती और चल समारोह संपन्न|



कार्तिक पूर्णिमा, औदीच्य ब्राह्मण दिवस के रूप में ओदिच्य ब्राह्मण समाज द्वारा देश भर में माने जाता है, सिद्धपुर औदीच्य ब्राह्मणों के मूल स्थान सहित जहाँ भी औदीच्य ब्राह्मण निवास कर रहे हैं, पर सी न किसी रूप में मनाया जाता है | इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम चल समारोह आदि स्थान के अनुसार निकलने की परंपरा है|
उज्जैन में कार्तिक पूर्णिमापर विशेष स्नानं होता है| इस कारण शहर में अत्यधिक भीड़ होती है, अत यहाँ चल समारोह और कार्यक्रम एक से तींन दिन बाद निकाला जाता है|
दिनांक29नवम्बर 15 को भगवान गोविन्द माधव के 200 सो से अधिक वर्ष पूर्व स्थापित कार्तिक चोक स्तिथ भगवान् गोविन्द माधव मंदिर में समाज जनों ने पूजन किया | तत्पश्चात चल समारोह कार्तिक चौक से पानदरीबा , गुदरी चौराहा, गोपाल मंदिर, छत्री चौक होते हुए, अब्दालपुरा औदीच्य धर्मशाला में पहुंचा। चल समारोह का जगह जगह स्वागत हुआ। छत्री चौक पर निगम अध्यक्ष श्री सोनू गेहलोत व खजुरवाली मस्जिद पर यादव समाज द्वारा विशेष स्वागत किया गया।
इसके अतिरिक अन्य स्थानो भी पर पुष्पवर्षा, से स्वागत किया गया समाज जनों ने श्वेत वस्त्र और महिलाओं ने पिट वस्त्र धारण कर समारोह में उत्साह पूर्वक भाग लिया अंत में पुन भगवन का पूजन कर समाज के सहभोज के बाद कार्यक्रम संपन्न हुआ|
जयगोविन्द माधव |


 



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